वाराणसी में स्वतंत्र पत्रकार का उत्पीड़न, कार्रवाई की मांग

वाराणासी। रोहनियाँ/राजातालाब (06/02/2021)वैसे तो मीडिया को भारतीय संविधान का चौथा स्तम्भ कहा जाता है और इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह सब कल्पनाओं पर ही आधारित दिखाई पड़ता है।

वाराणासी। रोहनियाँ/राजातालाब (06/02/2021)वैसे तो मीडिया को भारतीय संविधान का चौथा स्तम्भ कहा जाता है और इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह सब कल्पनाओं पर ही आधारित दिखाई पड़ता है। सच्चाई तो यह है आज के इस समाज में जब चारों तरफ भ्रष्टाचार का बोलबाला हो और माफिया से लेकर तमाम अपराधी, नेता और ब्यूरोक्रेट्स किसी न किसी प्रकार अवैध कार्यों में लिप्त हो चुके हों, ऐसे पत्रकारिता करना इतना आसान भी नहीं है और न ही पत्रकारों के लिए अभिव्यक्ति की आज़ादी बची हुई दिखाई पड़ रही है। समाचारों के संकलन में पत्रकारों के लिए अपराधी और माफिया तो घातक होते ही हैं, समाज के सफ़ेद पोश नेता और ब्यूरोक्रेट, पुलिस भी अब इन्हें फूटी आँख नहीं सुहाते हैं। इन सभी को लगता है कि उनके अवैध और गलत कार्यों में सबसे बड़ा बाधक अगर कोई है तो वह पत्रकार ही है।

ऐसा ही एक मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणासी के जंसा थाने का सामने आया है, जब इस थाना क्षेत्र के हरसोस गाँव में राजातालाब निवासी एक दिव्यांग पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता 02 फ़रवरी को मनरेगा दिवस मना रहे मज़दूरों के समाचार की कवरेज कर रहे थे, उसी समय जंसा थाने के एक अधिकारी की नजर इनके कैमरे के संचालन पर पड़ी, जिसके बाद इस पत्रकार को पकड़ कर पुलिस थाने लाकर हवालात डाल दिया।

पुलिस घंटो थाने बैठाकर करती रही पूछताछ

बताते चलें कि गाँव के एक शराबी ने उक्त मनरेगा दिवस के कार्यक्रम में हंगामा करते हुए पुलिस को झूठी सूचना दी थी शराबी की सूचना पाते ही पुलिस ऐसे हरकत में आई मानों कोई अपराधी पकड़ लिया हो और पकड़े गए पत्रकार का पूरा इतिहास भूगोल खंगाल डाला। इतना ही नहीं पुलिस ने पत्रकार का मोबाइल भी छीन लिया और उसमें रिकार्ड सभी डाटा भी डिलीट कर दिया। लगभग तीन घंटे तक पुलिस ने इस पत्रकार को बैठाए रखा और अंत में उत्पीड़न करते हुए लिखित माफीनामे के आधार पर उसे छोड़ा।

पत्रकारों और सामाजिक संगठनों में गुस्सा, जल्द आलाधिकारियों से मिलकर कार्रवाई की मांग रखेंगे,

तीन दिन पूर्व की इस घटना की खबर जब जिले के पत्रकारों को हुई और जब लोगों ने यह सुना कि एक शराबी की झूठी सूचना पर पुलिस ने पत्रकार को अपमानित और उत्पीड़न किया है। इसी बात से नाराज जिले के विभिन्न समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े पत्रकारों, सामाजिक संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए जल्द ही आलाधिकारियों से मुलाकात करके पूरे मामले को राज्यपाल को संबोधित एक मांग पत्र भेजकर शराबी और सम्बंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की मांग करेंगे।

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राजेश राय, संपादक, जनसत्ता एक्सप्रेस

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